मध्य प्रदेश में एक जून से 10 जून तक प्रस्तावित किसानों के गांव बंद आंदोलन को लेकर दोनों पक्ष पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं. इंदौर में किसान किसी भी हालत में आंदोलन को सफल बनाने में गुपचुप रणनीति बनाने और प्रचार-प्रसार में जुटे हुए हैं तो सरकार के संकेत पर पुलिस-प्रशासन के अफसर आंदोलन को रोकने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जुट गए हैं.किसान आंदोलन को लेकर इंदौर डीआइजी ने बताया कि अतिरिक्त बल की मौजूदगी रहेगी. हिंसा भड़काने वालों पर निगाहें बनी हुई हैं. उन पर प्रतिबंधात्मक कार्यवाही की जायेगी, साथ ही सोशल मीडिया पर भी लगातार कई दल मानिटीरिंग करेंगे. हालांकि इंटेलीजेंस से मिली रिपोर्ट के अनुसार कुछ इलाकों में किसान आन्दोलन के नाम पर हिंसा भडकाने के प्रयास किए जा सकते हैं.आंदोलन में किसानों को भड़काने और उपद्रव की आशंका के चलते पुलिस ने पिछले किसान आन्दोलन में बढ़-चढ़ कर हिसा लेने वालो पर कार्यवाही की बात की है साथ ही कहा कि उनसे लगातार समन्वय बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं.
राजेंद्रनगर पुलिस ने तो एक विधायक के भाई और भांजे को भी उपद्रवियों की सूची में डाल दिया है. दोनों के खिलाफ 107(16) के तहत कायमी कर एसडीएम कोर्ट में इश्तगाशा पेश किया जा चुका है. सूत्रों के मुताबिक ग्रामीण इलाको के करीब 70 किसान ऐसे हैं जिन पर हंगामा, विवाद और आगजनी करने का शक है.
1 से 10 जून तक होने वाले किसान आंदोलन के दौरान सब्जी की आवक रुकने के डर से उपभोक्ताओं ने सब्जियों का संग्रहण शुरू कर दिया है. वही इन सबसे दूर इंदौर डीआइजी ने पहले से ही कमान अपने हाथ में लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए है कि कथित किसान आन्दोलन के नाम पर किसी भी तरह की हिंसा नहीं भड़कनी चाहिए. सोशल मीडिया पर इंदौर पुलिस लगातार संदेश भेज रही है और किसानो को किसी भी प्रकार के आंदोलन के बहकावे में ना आने की अपील कर रही है. साथ ही आम जनता से भी अपील की जा रही है किसी भी तरह के भ्रामक संदेश सोशल मीडिया पर भेजने से बचे.
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