कांग्रेस देखेगी दस का दम, यही है टिकट के लिए पार्टी का फॉर्मूला - Best News

NEWS- Latest news and Breaking news in Hindi The news media or news industry are forms of mass media that focus on delivering news to the general public or a target public

कांग्रेस देखेगी दस का दम, यही है टिकट के लिए पार्टी का फॉर्मूला

Share This
सत्ता में वापसी की कोशिश में जुटी कांग्रेस इस बार ठोक बजा कर ही मैदान में अपने प्रत्याशी उतारेगी

Updated: July 20, 2018, 9:10 AM IST
प्रदेश में 15 साल से सत्ता से दूर रही कांग्रेस अब मिशन 2018 को पूरा करने के लिए अपने ही दावेदारों के 'दस का दम' देखेगी. हाईकमान ने विधानसभा टिकट के लिए फॉर्मूला भी तय कर दिया है. दस का दम दिखाने वाले को ही पार्टी टिकट थमाकर मैदान में उतारेगी.

मध्य प्रदेश में कांग्रेस की कमान संभालने के बाद कमलनाथ ने साफ कर दिया था कि जो उम्मीदवार जिताऊ होगा, उसे ही विधानसभा का टिकट दिया जाएगा. टिकट वितरण से पहले हाईकमान ने भी दावेदारों के लिए यही फॉर्मूला फिक्स कर दिया है. यानी टिकट हासिल करने के लिए उसे सबसे पहले पार्टी को दस का दम दिखाना पड़ेगा.

दस का दम ये है कि विधानसभा चुनाव 2008 और 2013 में हारने वाले उम्मीदवारों को पार्टी किसी भी हाल में टिकट नहीं देगी. दूसरी बात ये कि 2013 में 20 हजार से ज़्यादा मतों से हारने वाले प्रत्याशी को टिकट नहीं मिलेगा. अगर एक ही परिवार से दो अलग-अलग सदस्यों को अवसर मिला और वो पराजित हुए हैं, तो अब उन्हें इस बार मौका नहीं दिया जाएगा. शर्त ये भी है कि वर्तमान विधायक के ख़िलाफ अगर लोकसभा प्रत्याशी ने शिकायत की है, तो उसकी पूरी समीक्षा के बाद ही तय किया जाएगी कि टिकट दिया जाए या नहीं.

टिकट के दावेदार के परिवार का कोई सदस्य अगर भाजपा का पदाधिकारी या जनप्रतिनिधि है, तो उसकी भी समीक्षा की जाएगी. पैनल में नाम तय करने के बाद टिकट तय होगा. पार्टी इस बात पर भी विचार करेगी कि नए सदस्य जो भाजपा या दूसरी पार्टियों से कांग्रेस में आए हैं, उन्हें टिकट देने से बाक़ी सीटों पर क्या सकारात्मक या नकारात्मक असर पड़ेगा. इसकी भी समीक्षा करने के बाद स्थानीय नेताओं की सर्वसम्मति से टिकट दिया जाएगा. विधानसभा क्षेत्र में एक ही प्रभावशाली जाति विशेष का प्रत्याशी अगर लगातार दो बार से हार रहा है तो समीक्षा के बाद अन्य जाति के उम्मीदवार को टिकट में प्राथमिकता मिलेगी.
जिन सीटों पर लगातार तीन या अधिक बार से पार्टी विधानसभा चुनाव हार रही है, वहां की समीक्षा अलग से की जाएगी. उन सीटों पर पार्टी के युवा या अन्य सामाजिक क्षेत्र से कांग्रेस विचारधारा वाले सोशल वर्कर-आरटीआई एक्टिविस्ट हों तो उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी.

दो हजार से कम अंतर से हारी सीटों की समीक्षा अलग से की जाएगी. इस अंतराल में अगर पुराने प्रत्याशी वहां सक्रिय रहे हैं, तो उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी. आख़िरी और दसवीं शर्त ये रहेगी कि अगर दो या उससे अधिक बार अन्य दल या फिर निर्दलीय प्रत्याशी रहते हुए हार मिली है, तो उसे टिकट नहीं दिया जाएगा.

चुनाव प्रचार अभियान समिति के प्रमुख और गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया भी कह चुके हैं कि इस बार विधानसभा चुनाव में 30 फीसदी टिकट बिल्कुल नए चेहरों को दिए जाएंगे. हाईकमान टिकट वितरण को लेकर तीन एजेंसियों से सर्वे करा रहा है. दो सर्वे रिपोर्ट हाईकमान को मिल भी चुकी हैं. एक सर्वे रिपोर्ट आना बाकी है. हाईकमान तीनों सर्वे रिपोर्ट के साथ दावेदारों के लिए तय किए गए इन दस बिंदुओं को भी देखेगी.

सारे मापदंड पर खरा उतरने के बाद ही संभावितों को टिकट दिया जाएगा. पार्टी अगस्त में उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर देगी. एक-एक सीट से कई दावेदार हैं. उनके नाम हाईकमान के पास गए हैं, लेकिन दस का दम दिखाने वाले को ही चुनाव में दम दिखाने का मौका मिलेगा.

from Latest News मध्य प्रदेश News18 हिंदी https://ift.tt/2uAx87t

No comments:

Post a Comment