BJP के नए प्लान के मुताबिक अब उन सीटों पर ज्यादा फोकस होगा जहां दलित-आदिवासी वोट निर्णायक भूमिका हैं. साथ ही पार्टी उन्हीं मुद्दों को उठाएगी जिनसे इस वोट बैंक के खिसकने का डर है
Updated: July 18, 2018, 4:00 PM IST
मध्य प्रदेश में कांग्रेस और बीएसपी गठबंधन की अटकलों के बीच BJP ने अपनी प्लानिंग में बदलाव किया है. पार्टी अब उन सीटों पर ज्यादा फोकस करेगी जहां एससी-एसटी वर्ग के वोटर ज्यादा हैं. साथ ही BJP ने टॉप लीडर्स की एक ऐसी टीम तैयार की है जो सभी 230 विधानसभा सीटों में जाकर दलित आंदोलन और आरक्षण जैसे मुद्दों पर चर्चा करेगी.
BJP के नए प्लान के मुताबिक अब उन सीटों पर ज्यादा फोकस होगा जहां दलित-आदिवासी वोट निर्णायक भूमिका हैं. साथ ही पार्टी उन्हीं मुद्दों को उठाएगी जिनसे इस वोट बैंक के खिसकने का डर है.
बीजेपी की प्लानिंग के मुताबिक,
-पार्टी चुनाव से पहले सभी 230 विधानसभा सीटों में जाकर सामाजिक आंदोलनों पर चर्चा करेगी, सामाजिक आंदोलनों में दलित आंदोलन का मुद्दा शामिल है
-साथ ही प्रमोशन में आरक्षण को लेकर आमने सामने आए सपाक्स और अजाक्स को लेकर भी चर्चा की जाएगी, इसके लिए 46 नेताओं की टीम तैयार की गई है
-एक टीम में दो नेता शामिल हैं जिन्हें 2 से 3 जिलों तक की जिम्मेदारी दी गई है, नेताओं की इस टीम में केंद्रीय मंत्री, सरकार के कैबिनेट मंत्री और सीनियर विधायक शामिल हैं
ये पढ़ें- बीएसपी से गठबंधन के बाद अब क्या सपा से हाथ मिलाने जा रही है कांग्रेस?
BJP की ये प्लानिंग इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि कांग्रेस-बीएसपी गठबंधन के बाद दलित-आदिवासी वोटबैंक के खिसकने का डर है. इसलिए भी क्योंकि दलित आंदोलन का ठींकरा विपक्ष की ओर से बीजेपी पर ही फोड़ने की कोशिश की गई थी.
मौजूदा वक्त में सीटों के गणित के लिहाज से देखें तो प्रदेश में एससी वर्ग की 35 सीटें आरक्षित हैं, जिसमें से 2 कांग्रेस, 3 बीएसपी और 30 बीजेपी के पास हैं. एसटी वर्ग की 47 सीटें हैं जिसमें से 32 बीजेपी और 15 कांग्रेस के पास हैं. अगर कांग्रेस-बीएसपी का गठबंधन होता है तो कहीं ऐसा न हो कि इसका सियासी खामियाजा बीजेपी को उठाना पड़े शायद यही वजह है कि बीजेपी ने तीर निशाने के लिए छोड़ दिया है.
BJP के नए प्लान के मुताबिक अब उन सीटों पर ज्यादा फोकस होगा जहां दलित-आदिवासी वोट निर्णायक भूमिका हैं. साथ ही पार्टी उन्हीं मुद्दों को उठाएगी जिनसे इस वोट बैंक के खिसकने का डर है.
बीजेपी की प्लानिंग के मुताबिक,
-पार्टी चुनाव से पहले सभी 230 विधानसभा सीटों में जाकर सामाजिक आंदोलनों पर चर्चा करेगी, सामाजिक आंदोलनों में दलित आंदोलन का मुद्दा शामिल है
-साथ ही प्रमोशन में आरक्षण को लेकर आमने सामने आए सपाक्स और अजाक्स को लेकर भी चर्चा की जाएगी, इसके लिए 46 नेताओं की टीम तैयार की गई है
-एक टीम में दो नेता शामिल हैं जिन्हें 2 से 3 जिलों तक की जिम्मेदारी दी गई है, नेताओं की इस टीम में केंद्रीय मंत्री, सरकार के कैबिनेट मंत्री और सीनियर विधायक शामिल हैं
ये पढ़ें- बीएसपी से गठबंधन के बाद अब क्या सपा से हाथ मिलाने जा रही है कांग्रेस?
BJP की ये प्लानिंग इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि कांग्रेस-बीएसपी गठबंधन के बाद दलित-आदिवासी वोटबैंक के खिसकने का डर है. इसलिए भी क्योंकि दलित आंदोलन का ठींकरा विपक्ष की ओर से बीजेपी पर ही फोड़ने की कोशिश की गई थी.
मौजूदा वक्त में सीटों के गणित के लिहाज से देखें तो प्रदेश में एससी वर्ग की 35 सीटें आरक्षित हैं, जिसमें से 2 कांग्रेस, 3 बीएसपी और 30 बीजेपी के पास हैं. एसटी वर्ग की 47 सीटें हैं जिसमें से 32 बीजेपी और 15 कांग्रेस के पास हैं. अगर कांग्रेस-बीएसपी का गठबंधन होता है तो कहीं ऐसा न हो कि इसका सियासी खामियाजा बीजेपी को उठाना पड़े शायद यही वजह है कि बीजेपी ने तीर निशाने के लिए छोड़ दिया है.
from Latest News मध्य प्रदेश News18 हिंदी https://ift.tt/2mrBs4y
No comments:
Post a Comment