शिक्षाविदों की राय है कि बस्ते का बोझ कम करके शिक्षा में नैतिक, व्यावहारिक शिक्षा के पाठ्यक्रम शामिल किए जाएं और पेरेंट्स के लिए भी काउंसलिंग शिविर लगाए जाएं.माता-पिता अपने बच्चे की क्षमता देखते हुए ही उनसे उम्मीद करें.from Latest News मध्य प्रदेश News18 हिंदी http://bit.ly/2L7bKlg
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