एक पति अपनी पत्नी को धोखा दे रहा था, पत्नी को शक था कि उसके पति का अफेयर चल रहा है, यह बात नयी नहीं लगती. लेकिन उस पति का एक नहीं, कई लड़कियों के साथ अफेयर चल रहा था. पढ़िए जासूस के अनुभवों पर विशेष सीरीज़ ‘लव सेक्स और धोखा’.
Updated: July 19, 2018, 7:29 PM IST
एक जासूस सिर्फ अपराध की तहकीकात ही नहीं करता बल्कि वह इंसानी मन और ज़िंदगी की परतों को भी टटोलता है. अपने पेशे में एक जासूस सामान्य दिखने वाले लोगों और रिश्तों के उन रहस्यों का पर्दाफाश करता है जो किसी जुर्म को बुन रहे होते हैं. hindi.news18.com की इस विशेष सीरीज़ में एक जासूस की ज़बानी रिश्तों में जुर्म की कहानी.
#LoveSexaurDhokha: बीवी थी बेवफा और 'बेवफाई' के इल्ज़ाम में तिहाड़ में था पति
अलका को अपने पति अविनाश पर शक था कि एक लड़की के साथ उसका अफेयर चल रहा है और वह उसे रंगे हाथों पकड़ना चाहती थी. एक पूरी जासूसी कवायद के बाद जब सच सामने आया तो अलका की आंखें फटी रह गईं. एक नहीं कई लड़कियों के साथ अविनाश का अफेयर चल रहा था और इस कहानी का दर्दनाक मोड़ यह था कि सब कुछ जानते हुए भी अलका इतनी मजबूर थी कि वह कुछ नहीं कर सकती थी.
यह एक ऐसी कहानी है जिसमें बेवफाई के मायने आप तलाश सकते हैं, सोसायटी के एक खास रवैये को कठघरे में खड़ा कर सकते हैं और इसमें आप शरतचंद्र जैसे पुराने लेखकों द्वारा बयान की गई चरित्रहीनता की प्रासंगिकता आज भी देख सकते हैं. कहानी कुछ इस तरह है कि जयपुर में रहने वाले अविनाश का आॅफिस जाने का टाइम फिक्स था लेकिन घर लौटने का नहीं. यानी वह सुबह एकदम समय से घर से चला जाता था. साढ़े आठ के पौने नौ भी नहीं बजने देता था. लेकिन देर रात कभी 11 तो कभी 12 तो कभी 1 बजे लौटता था.
घर लौटने के बाद थकान और परेशानी या सुबह फिर जल्दी जाने की बात कहकर सीधे बिस्तर पर जाता और सो जाता. अलका से कुछ बातचीत करता न अपने दो साल के बच्चे के साथ कोई खास वक्त बिताने में उसकी दिलचस्पी दिखती. कभी आॅफिस के काम से अचानक शहर से बाहर कुछ दिनों के लिए टूर पर चला जाता. कई दिनों तक यही सिलसिला चला और अलका अकेली और परेशान रहने लगी. अलका को समझ नहीं आता था कि अविनाश के बर्ताव में यह तब्दीली क्यों आ गई.

एक दिन अलका घर के रोज़मर्रा के कामों में मुब्तला थी तभी अलका के हाथ अविनाश के कुछ बिल्स लग गए. अलका ने जब इन्हें गौर से देखा तो उसके सामने वह हकीकत थी जो शक के तौर कभी कभी उसके खयालों में आ चुकी थी. एक लड़की थी प्रिया और अविनाश ने उसके हॉस्पिटल बिल चुकाए थे अपने क्रेडिट कार्ड के ज़रिये. हॉस्पिटल के बिल्स के ज़रिये अलका को पता चला कि प्रिया किसी साइकोलॉजिकल समस्या का इलाज करवा रही है और अविनाश के अकाउंट से इस इलाज के पैसे जा रहे हैं.
अब अलका के सामने अविनाश की बेवफाई का एक सबूत था लेकिन उसे फिर भी विश्वास नहीं हो रहा था कि उसका पति उसके साथ इस तरह धोखा कर रहा है. अलका को कहीं न कहीं यह भी महसूस हो रहा था कि अविनाश से अगर इस बारे में बातचीत की तो वह कोई न कोई बहाना या कहानी बनाकर इस बात से इनकार कर देगा. अब अलका ने अपने शक और बेवफाई के इस सबूत को लेकर जासूस की मदद से अविनाश को रंगे हाथों पकड़ने का इरादा किया.
फिर अलका ने हमसे संपर्क किया और यह सारी कहानी सुनाकर उसने अपना मकसद यही बताया कि वह अविनाश को रंगे हाथों पकड़ना चाहती है. हमने अलका से साफ पूछा भी तो उसने साफ तौर पर कहा कि 'नहीं, फोटो या वीडियो बनाने की ज़रूरत नहीं है. आप बस मुझे इन्फॉर्म करेंगे और मैं उसे रंगे हाथों पकड़ूंगी.' तो अब हमें जासूसी करना थी और अविनाश को रंगे हाथों पकड़ना था. हमने अपनी टीमों को अविनाश के पीछे लगाया और इधर प्रिया के बारे में जानकारी जुटाना शुरू किया.
पहला दिन
हमने जिस दिन से अविनाश पर नज़र रखना शुरू की, उस दिन वह सुबह तय वक्त पर घर से निकला और अपने आॅफिस की पार्किंग में कार पार्क करने के बाद सुबह करीब सवा नौ बजे आॅफिस पहुंच गया. हमारे जासूस उस पर निगरानी रख रहे थे. इसके करीब दो घंटे बाद सवा 11 से साढ़े 11 के बीच अविनाश आॅफिस से निकला और अपनी कार से एक बिल्डिंग के नीचे पहुंचा. एक ही मिनट में एक लड़की आकर उसकी कार में बैठ गई और दोनों वहां से चले तो सीधे एक मॉल पहुंचे. यहां दोनों एक मूवी देखने चले गए.

इससे पहले अविनाश ने अलका को फोन पर बताया कि वह आॅफिस के काम से शहर में ही आॅफिस की दूसरी ब्रांच में जा रहा है. इधर हमने प्रिया की डिटेल्स जुटाईं तो हमें पता चला कि अविनाश जिस लड़की के साथ है, वह तो प्रिया है ही नहीं. मूवी खत्म होने के बाद अविनाश उस लड़की के साथ लंच पर गया और फिर शॉपिंग पर. दोनों दिन भर साथ घूमते रहे और हम दोनों का पीछा करते रहे. रात करीब 12 बजे अविनाश घर पहुंचा. यह पूरी जानकारी हमने अलका को दी.
दूसरा दिन
इस दिन सुबह अपने वक्त पर अविनाश घर से निकला लेकिन इस दिन वह रेलवे स्टेशन के पास स्थित अपने आॅफिस नहीं पहुंचा. वह किसी और जगह गया और वहां से एक लड़की को उसने पिकअप किया. यह लड़की न तो प्रिया थी और न ही पिछले दिन वाली लड़की. इस लड़की के साथ अविनाश पहले मॉल गया जहां दोनों ने कुछ शॉपिंग की और लंच वगैरह करते हुए वक्त बिताया. फिर दोनों कार में बैठकर चल दिए.
हमारी टीम ने अविनाश की कार को फॉलो किया तो उसकी कार एक बिल्डिंग में जाकर रुकी. यहां से दोनों एक फ्लैट के अंदर चले गए और दरवाज़ा बंद हो गया. हमारी टीम का जो जासूस उन्हें फॉलो कर रहा था, उसने कोशिश की लेकिन जल्द यह पता नहीं लग सका कि वह फ्लैट किसका है. उस फ्लैट के अंदर क्या हो रहा था, यह भी पता कर पाना मुश्किल था. उस फ्लैट में दोनों कितनी देर रहेंगे, इसका भी कोई अंदाज़ा नहीं था. इस तरह दूसरा दिन बीत गया.

तीसरा दिन
अविनाश इस दिन सुबह घर से आॅफिस पहुंचा और दोपहर में लंच टाइम में उसने अलका को फोन किया कि शाम की ट्रेन से उसे आॅफिस के काम से जोधपुर जाना है. इस फोन के बाद लंच टाइम में अविनाश आॅफिस से निकलकर उसी फ्लैट में पहुंचता है जहां वह पिछले दिन एक लड़की के साथ गया था. थोड़ी देर उस फ्लैट में रहने के बाद शाम को अविनाश उसी लड़की के साथ फ्लैट से निकलता है और दोनों कार में बैठकर चल पड़ते हैं.
अब यह कार अविनाश के आॅफिस की पार्किंग में रुकती है. इधर, हम अपनी क्लाइंट अलका के साथ रेलवे स्टेशन पहुंच चुके थे क्योंकि अविनाश को अलका रंगे हाथों पकड़ना चाहती थी. लेकिन, हमारा साथी जासूस हमें बताता है कि अविनाश तो आॅफिस पहुंच गया तो हमें अजीब लगता है और यह शक भी होता है कि उसने जोधपुर जाने का कार्यक्रम रद्द तो नहीं कर दिया या ऐसा कोई प्लैन था ही नहीं. अस्ल में, अविनाश ने हमारे जासूस को अनजाने ही धोखा दे दिया था.
हमने पूछताछ की तो पता चला कि ट्रेन का वक्त लगभग हो चुका था और हम अलका के साथ उस प्लेटफॉर्म पर पहुंचे जहां से जोधपुर की ट्रेन रवाना होने वाली थी. हमारे लिए बहुत मुश्किल था कि पूरी ट्रेन के अंदर हम अविनाश को तलाश पाते. फिर भी किसी तरह हमारा एक साथी जासूस ट्रेन के भीतर पहुंच चुका था और तलाशी ले रहा था. तभी ट्रेन ने प्लेटफॉर्म से खिसकना शुरू किया और अलका ने अविनाश को फोन पर कहा - 'आप अभी ट्रेन से बाहर निकलिए. मैं स्टेशन पर ही हूं. मुझे पता है कि आप किसके साथ हैं और क्या कर रहे हैं, आप फौरन बाहर आइए.'
अविनाश इस फोन के बाद फौरन ट्रेन से बाहर आ गया. ट्रेन के भीतर हमारे जासूस ने देख लिया था कि वह लड़की अविनाश की ही सीट पर बैठी हुई थी. अविनाश ने बाहर आकर अलका से मुलाकात की और कहा - 'क्या हुआ? बात क्या है?' अलका ने उसे वहां से चलने के लिए कहा. अविनाश को पता चल चुका था कि अलका को शक हो गया है और वह मन ही मन कहानी सोच रहा था. दोनों ने स्टेशन से आॅटो लिया और अविनाश के आॅफिस पहुंचकर वहां से कार पिक की.

कार से घर जाते वक्त एक सड़क किनारे अविनाश ने कार रोकी और अलका के साथ बातचीत हुई. अविनाश ने सफाई देते हुए कहा - 'तुम तो जानती हो कि रुचि मेरी कलीग है और हम इसी तौर पर बस फ्रेंड है. मैं उसी के साथ आॅफिस के काम से जोधपुर जा रहा था. मेरी समझ में नहीं आता कि इसमें गलत क्या है! तुम्हें क्या गलतफहमी क्या हो गई है?' अलका ने भी अविनाश से कह दिया कि उसे सब पता है कि वह रुचि के फ्लैट पर जाता है और भी बहुत कुछ जो वह करता है.
दोनों की बात इस नोट पर खत्म हुई कि अगर इसी तरह चलता रहा तो दोनों के रास्ते अलग हैं. इसके बाद अलका को घर छोड़कर अविनाश फिर घर से निकल गया और उसी शाम वह रुचि के फ्लैट पर पहुंच गया लेकिन इस बार अविनाश सतर्क था. उसने अपनी कार रुचि के फ्लैट के सामने नहीं बल्कि थोड़ी दूरी पर खड़ी की थी. हमने अविनाश की इस हरकत की जानकारी भी अलका को दी. अलका उस फ्लैट पर पहुंची लेकिन तब तक अविनाश और रुचि उस फ्लैट पर नहीं थे.
दोनों फ्लैट के बाहर बने एक पार्क में बैठे थे और हमने उन्हें स्पॉट कर लिया था. लेकिन अलका जब पार्क तक पहुंची तो अलका ने अविनाश को नहीं बल्कि अविनाश ने अलका को आते हुए देख लिया था. अविनाश फौरन वहां से गया और अपनी कार पार्क के पास लेकर पहुंचा और उसने उल्टे अलका से सवाल किया कि वह यहां क्या कर रही है? फिर हमने दोनों की मौजूदगी में अपनी तीन दिनों की जासूसी के बारे में बताकर कहा कि अविनाश के साथ रुचि को कहां कहां स्पॉट किया जा चुका है.
#LoveSexaurDhokha: बीवी थी बेवफा और 'बेवफाई' के इल्ज़ाम में तिहाड़ में था पति
अलका को अपने पति अविनाश पर शक था कि एक लड़की के साथ उसका अफेयर चल रहा है और वह उसे रंगे हाथों पकड़ना चाहती थी. एक पूरी जासूसी कवायद के बाद जब सच सामने आया तो अलका की आंखें फटी रह गईं. एक नहीं कई लड़कियों के साथ अविनाश का अफेयर चल रहा था और इस कहानी का दर्दनाक मोड़ यह था कि सब कुछ जानते हुए भी अलका इतनी मजबूर थी कि वह कुछ नहीं कर सकती थी.
यह एक ऐसी कहानी है जिसमें बेवफाई के मायने आप तलाश सकते हैं, सोसायटी के एक खास रवैये को कठघरे में खड़ा कर सकते हैं और इसमें आप शरतचंद्र जैसे पुराने लेखकों द्वारा बयान की गई चरित्रहीनता की प्रासंगिकता आज भी देख सकते हैं. कहानी कुछ इस तरह है कि जयपुर में रहने वाले अविनाश का आॅफिस जाने का टाइम फिक्स था लेकिन घर लौटने का नहीं. यानी वह सुबह एकदम समय से घर से चला जाता था. साढ़े आठ के पौने नौ भी नहीं बजने देता था. लेकिन देर रात कभी 11 तो कभी 12 तो कभी 1 बजे लौटता था.

एक दिन अलका घर के रोज़मर्रा के कामों में मुब्तला थी तभी अलका के हाथ अविनाश के कुछ बिल्स लग गए. अलका ने जब इन्हें गौर से देखा तो उसके सामने वह हकीकत थी जो शक के तौर कभी कभी उसके खयालों में आ चुकी थी. एक लड़की थी प्रिया और अविनाश ने उसके हॉस्पिटल बिल चुकाए थे अपने क्रेडिट कार्ड के ज़रिये. हॉस्पिटल के बिल्स के ज़रिये अलका को पता चला कि प्रिया किसी साइकोलॉजिकल समस्या का इलाज करवा रही है और अविनाश के अकाउंट से इस इलाज के पैसे जा रहे हैं.
अब अलका के सामने अविनाश की बेवफाई का एक सबूत था लेकिन उसे फिर भी विश्वास नहीं हो रहा था कि उसका पति उसके साथ इस तरह धोखा कर रहा है. अलका को कहीं न कहीं यह भी महसूस हो रहा था कि अविनाश से अगर इस बारे में बातचीत की तो वह कोई न कोई बहाना या कहानी बनाकर इस बात से इनकार कर देगा. अब अलका ने अपने शक और बेवफाई के इस सबूत को लेकर जासूस की मदद से अविनाश को रंगे हाथों पकड़ने का इरादा किया.
फिर अलका ने हमसे संपर्क किया और यह सारी कहानी सुनाकर उसने अपना मकसद यही बताया कि वह अविनाश को रंगे हाथों पकड़ना चाहती है. हमने अलका से साफ पूछा भी तो उसने साफ तौर पर कहा कि 'नहीं, फोटो या वीडियो बनाने की ज़रूरत नहीं है. आप बस मुझे इन्फॉर्म करेंगे और मैं उसे रंगे हाथों पकड़ूंगी.' तो अब हमें जासूसी करना थी और अविनाश को रंगे हाथों पकड़ना था. हमने अपनी टीमों को अविनाश के पीछे लगाया और इधर प्रिया के बारे में जानकारी जुटाना शुरू किया.
पहला दिन
हमने जिस दिन से अविनाश पर नज़र रखना शुरू की, उस दिन वह सुबह तय वक्त पर घर से निकला और अपने आॅफिस की पार्किंग में कार पार्क करने के बाद सुबह करीब सवा नौ बजे आॅफिस पहुंच गया. हमारे जासूस उस पर निगरानी रख रहे थे. इसके करीब दो घंटे बाद सवा 11 से साढ़े 11 के बीच अविनाश आॅफिस से निकला और अपनी कार से एक बिल्डिंग के नीचे पहुंचा. एक ही मिनट में एक लड़की आकर उसकी कार में बैठ गई और दोनों वहां से चले तो सीधे एक मॉल पहुंचे. यहां दोनों एक मूवी देखने चले गए.

इससे पहले अविनाश ने अलका को फोन पर बताया कि वह आॅफिस के काम से शहर में ही आॅफिस की दूसरी ब्रांच में जा रहा है. इधर हमने प्रिया की डिटेल्स जुटाईं तो हमें पता चला कि अविनाश जिस लड़की के साथ है, वह तो प्रिया है ही नहीं. मूवी खत्म होने के बाद अविनाश उस लड़की के साथ लंच पर गया और फिर शॉपिंग पर. दोनों दिन भर साथ घूमते रहे और हम दोनों का पीछा करते रहे. रात करीब 12 बजे अविनाश घर पहुंचा. यह पूरी जानकारी हमने अलका को दी.
दूसरा दिन
इस दिन सुबह अपने वक्त पर अविनाश घर से निकला लेकिन इस दिन वह रेलवे स्टेशन के पास स्थित अपने आॅफिस नहीं पहुंचा. वह किसी और जगह गया और वहां से एक लड़की को उसने पिकअप किया. यह लड़की न तो प्रिया थी और न ही पिछले दिन वाली लड़की. इस लड़की के साथ अविनाश पहले मॉल गया जहां दोनों ने कुछ शॉपिंग की और लंच वगैरह करते हुए वक्त बिताया. फिर दोनों कार में बैठकर चल दिए.
हमारी टीम ने अविनाश की कार को फॉलो किया तो उसकी कार एक बिल्डिंग में जाकर रुकी. यहां से दोनों एक फ्लैट के अंदर चले गए और दरवाज़ा बंद हो गया. हमारी टीम का जो जासूस उन्हें फॉलो कर रहा था, उसने कोशिश की लेकिन जल्द यह पता नहीं लग सका कि वह फ्लैट किसका है. उस फ्लैट के अंदर क्या हो रहा था, यह भी पता कर पाना मुश्किल था. उस फ्लैट में दोनों कितनी देर रहेंगे, इसका भी कोई अंदाज़ा नहीं था. इस तरह दूसरा दिन बीत गया.

तीसरा दिन
अविनाश इस दिन सुबह घर से आॅफिस पहुंचा और दोपहर में लंच टाइम में उसने अलका को फोन किया कि शाम की ट्रेन से उसे आॅफिस के काम से जोधपुर जाना है. इस फोन के बाद लंच टाइम में अविनाश आॅफिस से निकलकर उसी फ्लैट में पहुंचता है जहां वह पिछले दिन एक लड़की के साथ गया था. थोड़ी देर उस फ्लैट में रहने के बाद शाम को अविनाश उसी लड़की के साथ फ्लैट से निकलता है और दोनों कार में बैठकर चल पड़ते हैं.
अब यह कार अविनाश के आॅफिस की पार्किंग में रुकती है. इधर, हम अपनी क्लाइंट अलका के साथ रेलवे स्टेशन पहुंच चुके थे क्योंकि अविनाश को अलका रंगे हाथों पकड़ना चाहती थी. लेकिन, हमारा साथी जासूस हमें बताता है कि अविनाश तो आॅफिस पहुंच गया तो हमें अजीब लगता है और यह शक भी होता है कि उसने जोधपुर जाने का कार्यक्रम रद्द तो नहीं कर दिया या ऐसा कोई प्लैन था ही नहीं. अस्ल में, अविनाश ने हमारे जासूस को अनजाने ही धोखा दे दिया था.
अविनाश ने आॅफिस के पिछले गेट से एक टैक्सी बुला ली थी और अपनी कार पार्किंग में छोड़कर वह टैक्सी से रेलवे स्टेशन पहुंचा था. इधर, हमने रेलवे स्टेशन पर पता किया कि जोधपुर के लिए इस वक्त कौन सी ट्रेन किस प्लेटफॉर्म पर है. इसी बीच अलका ने अविनाश को फोन किया और पूछा कि वह कहां है तो उसने कहा कि वह ट्रेन में है और जोधपुर के लिए रवाना होने वाला है. फोन पर अविनाश की तरफ से रेलवे स्टेशन के अनाउंसमेंट की आवाज़ भी सुनाई देती है.
हमने पूछताछ की तो पता चला कि ट्रेन का वक्त लगभग हो चुका था और हम अलका के साथ उस प्लेटफॉर्म पर पहुंचे जहां से जोधपुर की ट्रेन रवाना होने वाली थी. हमारे लिए बहुत मुश्किल था कि पूरी ट्रेन के अंदर हम अविनाश को तलाश पाते. फिर भी किसी तरह हमारा एक साथी जासूस ट्रेन के भीतर पहुंच चुका था और तलाशी ले रहा था. तभी ट्रेन ने प्लेटफॉर्म से खिसकना शुरू किया और अलका ने अविनाश को फोन पर कहा - 'आप अभी ट्रेन से बाहर निकलिए. मैं स्टेशन पर ही हूं. मुझे पता है कि आप किसके साथ हैं और क्या कर रहे हैं, आप फौरन बाहर आइए.'
अविनाश इस फोन के बाद फौरन ट्रेन से बाहर आ गया. ट्रेन के भीतर हमारे जासूस ने देख लिया था कि वह लड़की अविनाश की ही सीट पर बैठी हुई थी. अविनाश ने बाहर आकर अलका से मुलाकात की और कहा - 'क्या हुआ? बात क्या है?' अलका ने उसे वहां से चलने के लिए कहा. अविनाश को पता चल चुका था कि अलका को शक हो गया है और वह मन ही मन कहानी सोच रहा था. दोनों ने स्टेशन से आॅटो लिया और अविनाश के आॅफिस पहुंचकर वहां से कार पिक की.

कार से घर जाते वक्त एक सड़क किनारे अविनाश ने कार रोकी और अलका के साथ बातचीत हुई. अविनाश ने सफाई देते हुए कहा - 'तुम तो जानती हो कि रुचि मेरी कलीग है और हम इसी तौर पर बस फ्रेंड है. मैं उसी के साथ आॅफिस के काम से जोधपुर जा रहा था. मेरी समझ में नहीं आता कि इसमें गलत क्या है! तुम्हें क्या गलतफहमी क्या हो गई है?' अलका ने भी अविनाश से कह दिया कि उसे सब पता है कि वह रुचि के फ्लैट पर जाता है और भी बहुत कुछ जो वह करता है.
दोनों की बात इस नोट पर खत्म हुई कि अगर इसी तरह चलता रहा तो दोनों के रास्ते अलग हैं. इसके बाद अलका को घर छोड़कर अविनाश फिर घर से निकल गया और उसी शाम वह रुचि के फ्लैट पर पहुंच गया लेकिन इस बार अविनाश सतर्क था. उसने अपनी कार रुचि के फ्लैट के सामने नहीं बल्कि थोड़ी दूरी पर खड़ी की थी. हमने अविनाश की इस हरकत की जानकारी भी अलका को दी. अलका उस फ्लैट पर पहुंची लेकिन तब तक अविनाश और रुचि उस फ्लैट पर नहीं थे.
दोनों फ्लैट के बाहर बने एक पार्क में बैठे थे और हमने उन्हें स्पॉट कर लिया था. लेकिन अलका जब पार्क तक पहुंची तो अलका ने अविनाश को नहीं बल्कि अविनाश ने अलका को आते हुए देख लिया था. अविनाश फौरन वहां से गया और अपनी कार पार्क के पास लेकर पहुंचा और उसने उल्टे अलका से सवाल किया कि वह यहां क्या कर रही है? फिर हमने दोनों की मौजूदगी में अपनी तीन दिनों की जासूसी के बारे में बताकर कहा कि अविनाश के साथ रुचि को कहां कहां स्पॉट किया जा चुका है.
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